नन्ही सी चिड़िया
मेरे आंगन में
सुंदर -सुंदर पंख फैलाकर
आंगन में बिखरे दाने पर
कभी मटक -मटक
कभी फुदक -फुदक
और कभी इठलाकर
दाने को चुंग रही
वह गा गा कर
उसकी गायन में कैसी दिव्य शक्ति
उसकी गायन सुनकर गुलजार हुआ जग सारा
उसकी गायन से ही फैला सूरज का उजाला
नया सवेरा हर रोज वह लाती
नए स्वर में जब वह गीत सुनाती
नन्ही सी चिड़िया
मेरे आंगन में
सुंदर सुंदर पंख फैला कर जब आती
✍️Kartik Kusum
Comments
Post a Comment