मन में राधा, मन में श्याम, मन ही बन गया वृंदावन धाम। मन में राधा, मन में श्याम, मन ही बन गया वृंदावन धाम। निरंतर जपूँ राधा-राधा, कट जाएँ जीवन की सब बाधा। प्रभु आप बसें अंतर्मन में, आपसे खुशियाँ आएँ जीवन में। हर पल भजूँ मैं तेरा नाम, तेरी भक्ति ही मेरा काम। माधव, कैसी लीला तेरी, तूने जीवन-नैया सँवारी। सारे कार्य पूर्ण हुए, रहा न कोई शेष। श्याम-रंग में रंगा जो मन, मिट गए सारे द्वेष। चरणों में अब मिला ठिकाना, हर पल दूर हुआ क्लेश। जहाँ प्रेम है, वहीं श्याम हैं, समर्पण में ही सच्चा विश्राम है। न कहीं जाना, न कुछ पाना, राधा-नाम ही मेरा धाम है। मन-मंदिर में दीप जले, श्याम कृपा की पहचान है। धेनु चरावत श्याम-सलोने, वृंदावन की छवि मन भाए। उन चरणों में शीश नवाऊँ, जहाँ से जीवन अर्थ पाए। राधा-भाव में श्याम समाए, श्याम-नाम में राधा वास। जीवन धन्य हुआ प्रभु से, मिल गया सच्चा विश्वास। Kartik Kusum Yadav
नयना तोर निरखत, सपना देखत, सुघर रूपवा, गोरी तोर चमकत। बलखत केशिया, जान मारे हमरा, तोर बिना हम हियो अधूरा। सूरतिया बस गइल जब से दिल में, मन न लागे हमरा कोनो महफिल में। ई दिलवा तो दीवाना हो रानी, तोहर प्यार में । बाटियां निहारो हियो, तोरे इंतजार में। जे दिन तोर मिलन न होई, ओ दिन मनवा खूबे रोई। तोहर याद में बइठल रहि जाई, अँखियन में तैरै तोरे छविया। मन में ऊ चेहरा, बेरी-बेरी आवे, ऊ सुघर रूपवा, केतना सतावे। नील नयनवा तोर, नशा करावे, ऊपर से चश्मा, जान मार जाए। देहिया के अंगिया, नेहिया बढ़ावे, हमर सपनवा में बस तू ही आवे। मन न लागे एको पहर तोर बिन, रतिया कटे अब तारे गिन गिन। मन करे प्रेम के पंछी बन उड़ जियो, तोहर अटारिया पे आ के बइठी जियो। दिलवा के बतीयां तोहरे बतिईयों। केतना प्यार बा हमर दिल में एक पल बता दी तोह से मिल के। नयना तोर निरखत, सपना देखत, सुघर रूपवा, गोरी तोर चमकत। ✍️ रचनाकार: कार्तिक कुसुम मेरी और भी लिरिक्स पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇 https://mittikesur.blogspot.com