मन में राधा, मन में श्याम, मन ही बन गया वृंदावन धाम। मन में राधा, मन में श्याम, मन ही बन गया वृंदावन धाम। निरंतर जपूँ राधा-राधा, कट जाएँ जीवन की सब बाधा। प्रभु आप बसें अंतर्मन में, आपसे खुशियाँ आएँ जीवन में। हर पल भजूँ मैं तेरा नाम, तेरी भक्ति ही मेरा काम। माधव, कैसी लीला तेरी, तूने जीवन-नैया सँवारी। सारे कार्य पूर्ण हुए, रहा न कोई शेष। श्याम-रंग में रंगा जो मन, मिट गए सारे द्वेष। चरणों में अब मिला ठिकाना, हर पल दूर हुआ क्लेश। जहाँ प्रेम है, वहीं श्याम हैं, समर्पण में ही सच्चा विश्राम है। न कहीं जाना, न कुछ पाना, राधा-नाम ही मेरा धाम है। मन-मंदिर में दीप जले, श्याम कृपा की पहचान है। धेनु चरावत श्याम-सलोने, वृंदावन की छवि मन भाए। उन चरणों में शीश नवाऊँ, जहाँ से जीवन अर्थ पाए। राधा-भाव में श्याम समाए, श्याम-नाम में राधा वास। जीवन धन्य हुआ प्रभु से, मिल गया सच्चा विश्वास। Kartik Kusum Yadav