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आजादी का अमृत महोत्सव

है प्यारी
सुनहरी धरती
न्यारी न्यारी,
ओढ़े नील गगन की चादर
बहती गंगा यमुना अविरल
सौंधी खुशबू
धरती की हरियाली
सोन चिरैया
सोने की दाना
बंशी का चैन बजे
न दे कोई ताना
जहां हर दिन
लगे उत्सव 
वो देश मना रहा
आजादी का अमृत महोत्सव।

✍️कार्तिक कुसुम

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