जो इस धरा पे जन्म लिया
बचपन के खेल-खेल में
मिट्टी से मटमैला हुआ
सर से पांव तक
मिट्टी से लीट जाता था
शाम की वेला में जब
दौड़ा-दौड़ा घर जाता था।
मां आंचल फैलाकर
गले लगा लेती थी
माटी से लेपित तनु को
हाथो से सहलाती थी
और कहती
क्यों रोज-रोज बेटा
मिट्टी से लीट जाते हो
अपने अच्छे लिवास को
नित्य मटमैला करते हो
कैसी तेरी शौक चढ़ी है
इस मिट्टी से लीट जाने की
कीतना भी समझाऊ
तू करता हरदम मनमानी
बेटा मां से कहता
मां जिसे तुम मिट्टी कहती हो
वह भी तुम्हारी तरह माता है
तूने ही तो सिखलाई हो
यह सबकी भारत माता है
इस माटी से लेपित तनु को मां
इसे उपहास ना करना
यह भारत मां की करुणा है
इसका मजाक न करना
इस मिट्टी में असीम शक्ति है
संपूर्ण विश्व को बदलने की
जो जुड़ जाए इस मिट्टी से
निखर जाए तनु सह बुद्धि उनकी
मैं देख रहा हूं स्वप्न माते
एक ऐसे भारत का
जो जन्म लिए इस धरा पर
करे खुद पर गौरवान्वित मां
न हो यहां अन्न की किल्लत
और भूख का रोना मां
हरयाली से लहराए हरदम यह धरा
भारत का हर एक कोना-कोना मां
जहां मान -सम्मान हो
मेरी तरह माटी से लिटनेवाले
श्रमिक किसान अन्नदाता का
मैं देख रहा हूं सपना मां
एक ऐसे भारतमाता का
सदियों पुरानी हमारी संस्कृति
ज्ञात थी पूरे विश्व की
विश्व गुरु थे हम सबके मां
भान थी इस बात की
वैशाली बिहार की माटी मां
जिसने दुनिया को लोकतंत्र दिया
राम, कृष्ण, बुद्ध ने
इसी पावन धरा पर तो जन्म लिया
भगवान महावीर का संदेश
अहिंसा परमो धर्म का उपदेश
बाल्मीकि की महान ग्रंथ रामायण
सम्राट अशोक के योगदान
मगध साम्राज्य के वैभव का प्रतीक
अशोक चक्र, सिंह स्तंभ,भारत के राष्ट्रीय प्रतीक
नालंदा और विक्रमशिला की कृति पताका
ऐसे अनगिनत भारत मां की है गाथा।
इतनी समृद्ध संस्कृति मां
कैसे धूमिल हो गई ?
हमें इन्हें संजोना है मां
हमें इन्हें एक माले में पिरोना है मां ।
✍️ kartik Kusum Yadav
तथ्यपरक।
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